संदेश

2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

||भगवान मुझे अमीर बनाना चाहें मत बनाना बस बेटी देना या बहु देना तो ऐसे सुलझे हुए संस्कारों वाली सुधा जैसी देना ||

 बिटिया कुछ है क्या खाने को…. दोपहर तीन बजे के आसपास रामेश्वर बाबू ने बहु के कमरे में आवाज लगाते हुए कहा  ये भी कोई वक्त है खाने का और अभी ग्यारह बजे दिया था ना दूध वाला दलिया फिर अब....  तीन बजे है जो रोटी सब्जी बनाई थी खत्म हो गई है और आपको कोई काम तो है नहीं सिवाय खाना खाने के.... रसोई है या कोई फैक्ट्री जो आपके लिए चौबीस घंटे चलती रहेगी जाइए शाम को देखेंगे अभी मेरा फेवरेट सीरियल आ रहा है कहते हुए बहु ने नजरें फिर से टीवी पर टिका दी रामेश्वर बाबू चुपचाप वहां से अपने कमरे की और बढ़ गये ये सब कुछ वहां झाड़ू पोंछा बर्तन का काम करने वाली सुधा देख रही थी वह मन ही मन सोचने लगी कि कहने को इतना बड़ा बंगला है बड़ी बड़ी गाडियां हैं पैसा है मगर इतने बड़े बंगले पैसे होने के बावजूद दिल बहुत छोटा है इनका....जो अपने घर के पिता तुल्य ससुरजी की सेवा नहीं कर सकते कम से कम उन्हें भूखे पेट तो मत रखो...काश... अगर मेरे ससुर जी होते तो मैं पिता की भांति उनकी सेवा करती  काम करते करते अचानक उसे स्मरण हुआ ना जाने कितने फल और बादाम काजू डायनिंग टेबल पर पड़े-पड़े सड़ते रहते है और अधिकतर बासी हो...